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स्वदेशी रक्षा उत्पादन क्षमता को बढ़ावा

स्वदेशी रक्षा उत्पादन क्षमता को बढ़ावा
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स्वदेशी रक्षा उत्पादन क्षमता को बढ़ावा

  • सरकार ने रक्षा निर्माण में स्वदेशीकरण और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए कई नीतिगत पहल और सुधार लाए हैं।
  • यह कदम रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत मिशन के तहत उठाए गए हैं।
  • यह विदेशी आयात पर निर्भरता को कम करने और सुरक्षा को मजबूत करने में मदद करेगा।

महत्वपूर्ण नीतिगत पहल

  1. अगस्त 2020 में 101 वस्तुओं की 'पहली सकारात्मक स्वदेशीकरण सूची' और मई, 2021 में 108 वस्तुओं की 'दूसरी सकारात्मक स्वदेशीकरण सूची' की अधिसूचना, जिसके लिए उनके खिलाफ संकेतित समय सीमा से परे आयात पर प्रतिबंध होगा।
  • यह रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण को बढ़ावा देने के लिए यह एक बड़ा कदम है।
  • यह भारतीय रक्षा उद्योग को, भारतीय सशस्त्र बलों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए, अपने स्वयं के डिजाइन और विकास क्षमताओं का उपयोग करके इन वस्तुओं का निर्माण करने का एक बड़ा अवसर प्रदान करता है।
  • सूचियों में कुछ उच्च प्रौद्योगिकी हथियार प्रणालियाँ, जैसे आर्टिलरी गन, असॉल्ट राइफल, कोरवेट, सोनार सिस्टम, ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट, लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर (LCH), रडार, व्हील्ड आर्मर्ड प्लेटफॉर्म, रॉकेट, बम आदि शामिल हैं।
  1. अगस्त, 2020 में, स्वदेशीकरण को बढ़ावा देने के लिए SRIJAN पोर्टल लॉन्च किया गया था।
  • आज की तारीख में, दस हजार से अधिक आइटम, जो पहले आयात किए गए थे, स्वदेशीकरण के लिए पोर्टल पर प्रदर्शित किए गए हैं।
  • भारतीय उद्योग ने अब तक 2,890 प्रदर्शित वस्तुओं के लिए रुचि दिखाई है।
  • डीपीएसयू/ओएफबी मौजूदा प्रक्रियाओं के अनुसार वस्तुओं के स्वदेशीकरण की सुविधा के लिए इन उद्योगों के साथ बातचीत कर रहे हैं।
  1. डीपीएसयू, ओएफबी और एसएचक्यू द्वारा, स्वदेशीकरण की अपनी प्रक्रिया के माध्यम से, स्वदेशीकरण के प्रयासों के परिणामस्वरूप वर्ष 2020-21 में 1,776 घटकों और पुर्जों का स्वदेशीकरण किया गया है।
  2. डीपीपी-2016 को डिफेंस एक्विज़िशन प्रोसेज्यर(DAP)-2020 के रूप में संशोधित किया गया है, जो 'आत्मनिर्भर भारत अभियान' के हिस्से के रूप में घोषित, रक्षा सुधारों के सिद्धांतों से प्रेरित है।
  1. 'खरीदें {भारतीय-आईडीडीएम (स्वदेशी रूप से डिजाइन, विकसित और निर्मित)}' श्रेणी को रक्षा उपकरणों के स्वदेशी डिजाइन और विकास को बढ़ावा देने के लिए पूंजीगत उपकरणों की खरीद के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है।
  2. पूंजी खरीद की 'मेक' प्रक्रिया को सरल बनाया गया है।
  3. मेक-I श्रेणी के तहत, भारतीय उद्योग को सरकार द्वारा विकास लागत का 70% तक वित्त पोषण करने का प्रावधान है।
  4. एफडीआईः सरकार ने नए रक्षा औद्योगिक लाइसेंस चाहने वाली कंपनियों के लिए ऑटोमेटिक रूट के जरिए रक्षा क्षेत्र में 74 फीसदी तक, और सरकारी रूट से 100 फीसदी तक एफडीआई बढ़ाया है।
  5. अप्रैल, 2018 में इनेवेशन्स फाॅर डिफेंस एक्सिलेंस (iDEX) नामक रक्षा के लिए एक नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र शुरू किया गया है।
  • iDEX का उद्देश्य, उद्योगों को शामिल करके रक्षा और एयरोस्पेस में नवाचार और प्रौद्योगिकी विकास को बढ़ावा देने के लिए एक पारितंत्र का निर्माण करना है।
  1. ऑफसेट नीति को उच्च गुणक प्रदान करके, उसके सुधारों को डीएपी-2020 में शामिल किया गया है, जिसमें निवेश को आकर्षित करने और रक्षा निर्माण के लिए प्रौद्योगिकी के हस्तांतरण पर जोर दिया गया है।
  2. सरकार ने मई, 2017 में 'स्ट्रेतेजिक पार्टनरशिप (SP)' मॉडल को अधिसूचित किया है।
  • यह मॉडल एक पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया के माध्यम से, भारतीय संस्थाओं के साथ दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी की स्थापना की परिकल्पना करता है
  • घरेलू विनिर्माण अवसंरचना और आपूर्ति श्रृंखला स्थापित करने के लिए, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण की मांग करने के लिए भारतीय संस्थाएं वैश्विक ओरिजिनेल इक्विपमेंट मेनूफेक्चरर्स (OEM) के साथ गठजोड़ करेंगी।
  1. 'डिफेंस प्लेटफॉर्म्स में इस्तेमाल होने वाले कलपुर्जों और पुर्जों के स्वदेशीकरण की नीति' को, मार्च 2019 में अधिसूचित किया गया था, जिसका उद्देश्य एक उद्योग पारितंत्र बनाना है, जो आयातित घटकों को स्वदेशी बनाने में सक्षम होंगे।
  1. सरकार ने उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु राज्यों में एक-एक रक्षा औद्योगिक काॅरिडोर स्थापित किए हैं।
  • वर्ष 2024 तक, उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु के रक्षा काॅरिडोर में 20,000 करोड़ रुपये के निवेश की योजना है।
  • शीर्ष स्तर पर प्रगति की नियमित रूप से समीक्षा की जाती है।
  • अब तक, सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की कंपनियों द्वारा लगभग 3,342 करोड़ रुपये का निवेश, दोनों काॅरिडोर में बनाए गए हैं।
  • संबंधित राज्य सरकारों ने भी इन दो कॉरिडोर में निजी खिलाड़ियों के साथ-साथ ओरिजिनेल इक्विपमेंट मेनूफेक्चरर्स (OEM) सहित, विदेशी कंपनियों को आकर्षित करने के लिए अपनी एयरोस्पेस और रक्षा नीतियों की घोषणा की है।
  1. सितंबर 2019 में 'रूसी/सोवियत मूल के हथियारों और रक्षा उपकरणों से संबंधित पुर्जों, घटकों, समुच्चय और अन्य सामग्री के संयुक्त निर्माण में आपसी सहयोग' पर एक इंटर गाॅवर्नमेंटल एग्रीमेंट (IGA) पर हस्ताक्षर किए गए थे।
  • इस IGA का उद्देश्य 'मेक इन इंदिया' के ढांचे के तहत, भारतीय उद्योग द्वारा भारत के क्षेत्र में पुर्जों और घटकों के उत्पादन का आयोजन करके, भारतीय सशस्त्र बलों में वर्तमान में सेवा में रूसी मूल के उपकरणों की बिक्री के बाद समर्थन और परिचालन उपलब्धता को बढ़ाना है।
  1. औद्योगिक लाइसेंस की आवश्यकता वाले रक्षा उत्पादों की सूची को युक्तिसंगत बनाया गया है और अधिकांश भागों या घटकों के निर्माण के लिए औद्योगिक लाइसेंस की आवश्यकता नहीं है।
  1. रक्षा उत्पादन विभाग ने डिपार्टमेंट फाॅर प्रोमोशन आफॅ इंडस्ट्री एंड इंटर्नेल ट्रेड (DPIIT) द्वारा अधिसूचित नवीनतम सार्वजनिक खरीद आदेश, 2017 के तहत, 46 वस्तुओं को अधिसूचित किया है, जिसके लिए पर्याप्त स्थानीय क्षमता और प्रतिस्पर्धा है।
  • इन वस्तुओं की खरीद स्थानीय आपूर्तिकर्ताओं से ही की जाएगी, चाहे खरीद मूल्य कुछ भी हो।
  1. इस क्षेत्र में निवेश के अवसरों, प्रक्रियाओं और नियामक आवश्यकताओं से संबंधित प्रश्नों को संबोधित करने सहित, सभी आवश्यक जानकारी प्रदान करने के लिए मंत्रालय ने फरवरी-2018 में डिफेंस इंवेस्टर सेल (DIC) बनाया गया है।
  2. सार्वजनिक/निजी उद्योगों, विशेष रूप से एमएसएमई और स्टार्टअप की भागीदारी के माध्यम से, रक्षा प्रौद्योगिकी में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए डीआरडीओ के तहत टेक्नोलोजी डेवलोप्मेंट फंड (TDF) बनाया गया है।"

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