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कलकत्ता उच्च न्यायालय ने सहमति से अंतरधार्मिक विवाह करने वाले वयस्कों के अधिकार को बरकरार रखा।

01 August, 2026
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कलकत्ता उच्च न्यायालय ने सहमति से अंतरधार्मिक विवाह करने वाले वयस्कों के अधिकार को बरकरार रखा।
मुख्य पहलूविवरण
न्यायालय एवं पीठकलकत्ता उच्च न्यायालय, न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की पीठ।
मुख्य निर्णयदो सहमति से विवाह करने वाले वयस्कों के विवाह में धर्म बाधा नहीं बन सकता।
कानूनी आधारभारतीय कानून के अंतर्गत ऐसा कोई कानूनी प्रतिबंध नहीं है जो सहमति से अंतरधार्मिक विवाह करने वाले वयस्कों को रोकता हो।
पुलिस सुरक्षा का निर्देशपश्चिम बंगाल पुलिस को विवाह पंजीकरण के दौरान संबंधित दंपति को पर्याप्त सुरक्षा प्रदान करने का निर्देश दिया गया।
न्यायिक निर्देशपुलिस को कार्रवाई प्रतिवेदन (Action Taken Report - ATR) न्यायालय में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया।
संवैधानिक संदर्भयह निर्णय भारतीय संविधान के तहत जीवन, व्यक्तिगत स्वतंत्रता तथा अपनी पसंद के अनुसार जीवनसाथी चुनने के अधिकार की पुष्टि करता है।
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