केंद्र द्वारा संस्कृतियों, स्वदेशी, आदिवासी समाजों की सामाजिक प्रथाओं का दस्तावेजीकरण करने की योजना
- राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST), केंद्र सरकार के साथ मिलकर अब भारत में स्वदेशी और जनजातीय समाजों की संस्कृतियों और सामाजिक प्रथाओं के "पुनः प्रलेखन" पर जोर दे रहा है।
प्रस्ताव
- यह योजना भारत के स्वदेशी और जनजातीय समुदायों के अधिक समाजशास्त्रियों, मानवविज्ञानी और शोधकर्ताओं को प्रोत्साहित करने के लिए है कि वे अपने समुदायों की सांस्कृतिक, सामाजिक और ऐतिहासिक प्रथाओं पर शोध करें और इस विषय पर औपनिवेशिक युग के कार्य को प्रतिस्थापित करें।
बहुमूल्य ज्ञान
- जनजातीय समुदायों के ज्ञान को भारतीय ज्ञान प्रणाली (IKS) में शामिल करने की आवश्यकता है, जिस पर अब राष्ट्रीय शिक्षा नीति ध्यान केंद्रित कर रही है।
ध्यानाकर्षण क्षेत्र
- बीमारियों के इलाज के तरीके
- हथियार बनाने के तरीके
- प्रकृति की रक्षा के तरीके
- सामुदायिक गीतों के माध्यम से ज्ञान देने के तरीके।

