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कर्नाटक उच्च न्यायालय ने मासिक धर्म अवकाश को मौलिक अधिकार के रूप में मान्यता दी।

कर्नाटक उच्च न्यायालय ने मासिक धर्म अवकाश को मौलिक अधिकार के रूप में मान्यता दी।
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कर्नाटक उच्च न्यायालय ने मासिक धर्म अवकाश को मौलिक अधिकार के रूप में मान्यता दी।

मुख्य पहलूविवरण
न्यायालय एवं निर्णयकर्नाटक उच्च न्यायालय ने सभी क्षेत्रों में, जिसमें असंगठित कार्यबल भी शामिल है, मासिक धर्म अवकाश नीति के सख्त कार्यान्वयन का निर्देश दिया। इसे अनुच्छेद 21 के तहत गरिमा से जुड़े मौलिक अधिकार के रूप में मान्यता दी।
कानूनी आधार- अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) में गरिमा का अधिकार शामिल है। <br> - न्यायालय ने कहा कि मासिक धर्म अवकाश मानवीय कार्य परिस्थितियों को सुनिश्चित करता है। <br> - यह अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) का उल्लंघन नहीं करता, बल्कि वास्तविक समानता (Substantive Equality) को बढ़ावा देता है।
कार्यान्वयन निर्देश- असंगठित क्षेत्र तक लाभों का विस्तार किया जाए। <br> - दिशा-निर्देशों/परिपत्रों के माध्यम से समान रूप से लागू किया जाए। <br> - यह नीति कर्नाटक मासिक धर्म अवकाश एवं स्वच्छता विधेयक, 2025 के लागू होने तक जारी रहेगी।

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