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केरल की सिल्वरलाइन परियोजना

केरल की सिल्वरलाइन परियोजना
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केरल की सिल्वरलाइन परियोजना

  • पिछले हफ्ते, केरल कैबिनेट ने सिल्वरलाइन के लिए भूमि अधिग्रहण शुरू करने के लिए हरी बत्ती दिखाई, इसकी प्रमुख सेमी हाई-स्पीड रेलवे परियोजना का उद्देश्य राज्य के उत्तरी और दक्षिणी छोर के बीच यात्रा के समय को कम करना है।
  • इस परियोजना में राज्य के दक्षिणी छोर और राज्य की राजधानी तिरुवनंतपुरम को कासरगोड के उत्तरी छोर से जोड़ने के लिए राज्य के माध्यम से एक सेमी हाई-स्पीड रेलवे कॉरिडोर का निर्माण करना शामिल है।
  • इसका उद्देश्य प्रमुख जिलों और कस्बों को सेमी हाई-स्पीड ट्रेनों से जोड़ना है जो अपने ट्रैक पर चलेंगी।
  • केरल रेल विकास निगम लिमिटेड (KRDCL) (रेल मंत्रालय और केरल सरकार के बीच एक संयुक्त उद्यम) इस परियोजना को क्रियान्वित करेगा।
  • परियोजना की समय सीमा 2025 है।

विशेषताएं:

  • रेलवे लाइन लगभग 529 किलोमीटर लंबी होगी, जिसमें 11 स्टेशनों के माध्यम से 11 जिलों को शामिल किया जाएगा।
  • इस परियोजना में इलेक्ट्रिक मल्टीपल यूनिट (EMU) प्रकार की ट्रेनें होंगी जिनमें अधिमानतः नौ बोग्गियां होंगी जिन्हे 12 बोग्गियां तक बढ़ाया जा सकता है।
  • एक नौ-बोगी रेक, व्यापार और मानक श्रेणी में अधिकतम 675 यात्रियों को बैठा सकती है।
  • ट्रेनें मानक गेज ट्रैक पर 220 किमी प्रति घंटे की अधिकतम गति से दौड़ सकती हैं, जिससे चार घंटे से भी कम समय में, किसी भी दिशा में यात्रा पूरी कर सकती हैं।
  • इस परियोजना में दो टर्मिनलों सहित कुल 11 स्टेशन प्रस्तावित हैं, जिनमें से तीन
  • ऊपर उठाया हुआ (एलिवेटेड), एक भूमिगत(अंडरग्राउंड) और बाकी सामान्य होंगी।

लाभ:

  • एक बार परियोजना पूरी हो जाने के बाद, कासरगोड से तिरुवनंतपुरम तक 200 किमी / घंटा की रफ्तार से चलने वाली ट्रेनों में चार घंटे से भी कम समय में यात्रा की जा सकती है, मौजूदा भारतीय रेलवे नेटवर्क पर वर्तमान यात्रा का समय 12 घंटे है।
  • मौजूदा रेलवे ट्रैक पर ट्रैफिक कम होगा।
  • यात्रियों के लिए यात्रा आसान और तेज हो जाएगी ।
  • सड़कों पर भीड़भाड़ कम होगा जिस कारण दुर्घटनाओं और मौतों को कम करने में मदद मिलेगी ।
  • यह ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करेगा।
  • यह रो-रो सेवाओं के विस्तार में मदद करेगा।
  • इससे कई रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
  • यह हवाई अड्डों और आईटी गलियारों को एकीकृत करेगा तथा जिन शहरों से गुजरेगा वहां तेजी से विकास होगा।

चुनौतियां:

  • केरल जैसे अत्यधिक घनी आबादी वाले राज्य में भूमि अधिग्रहण की समस्या।
  • कई पर्यावरणविद प्रस्तावित मार्ग के रास्ते में राज्य के पारिस्थितिकी तंत्र को संभावित नुकसान का हवाला दे रहे हैं।
  • राज्य की नदियों, धान के खेतों और आर्द्रभूमि पर अपरिवर्तनीय प्रभाव का डर है, जिससे भविष्य में बाढ़ और भूस्खलन हो सकता है।

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