Banner
Workflow

समता दिवस: बाबू जगजीवन राम की विरासत

समता दिवस: बाबू जगजीवन राम की विरासत
Contact Counsellor

समता दिवस: बाबू जगजीवन राम की विरासत

मुख्य पहलूविवरण
घटनासमता दिवस 5 अप्रैल को बाबू जगजीवन राम की जयंती के रूप में मनाया जाता है।
महत्वबाबू जगजीवन राम के समानता और न्याय के लिए किए गए प्रयासों को सम्मानित करता है। अस्पृश्यता, जातिवाद और भेदभाव के खिलाफ जागरूकता बढ़ाता है।
सार्वजनिक अवकाशतेलंगाना और आंध्र प्रदेश में सार्वजनिक अवकाश के रूप में मनाया जाता है।
बाबू जगजीवन राम कौन थे?स्वतंत्रता सेनानी, सामाजिक न्याय नेता और राजनीतिज्ञ। 50 साल तक संसद सदस्य और 30 साल तक केंद्रीय मंत्री रहे।
प्रारंभिक जीवन5 अप्रैल, 1908 को चंदवा गाँव, बिहार में जन्म। कम उम्र से ही अस्पृश्यता और भेदभाव का सामना किया। आरा टाउन स्कूल, बीएचयू, और कलकत्ता विश्वविद्यालय में शिक्षा प्राप्त की।
पारिवारिक जीवनपहली पत्नी का 1933 में निधन हो गया। इंद्राणी देवी से विवाह किया। सुरेश कुमार और मीरा कुमार (पूर्व लोकसभा स्पीकर) के पिता।
भेदभाव के खिलाफ संघर्षस्कूल और कॉलेज में जाति आधारित भेदभाव का सामना किया। समान अधिकार और सामाजिक न्याय की वकालत की।
सामाजिक समानता के लिए कार्यअखिल भारतीय रविदास महासभा और अखिल भारतीय दलित वर्ग लीग की 1934 में स्थापना की। अस्पृश्यों सहित सभी के लिए मंदिरों और कुओं तक खुली पहुँच की वकालत की।
स्वतंत्रता संग्राम में भूमिकासविनय अवज्ञा आंदोलन (1940) और भारत छोड़ो आंदोलन (1942) में भाग लिया। आजादी के बाद भारत के पहले श्रम मंत्री और 1971 के भारत-पाक युद्ध के दौरान रक्षा मंत्री रहे।
राजनीतिक करियर28 साल की उम्र में बिहार विधान परिषद के सदस्य बने (1936)। भारत के उप प्रधान मंत्री (1977) रहे। 50 साल तक लगातार संसदीय सेवा का विश्व रिकॉर्ड बनाया।
निधन और स्मारक6 जुलाई, 1986 को निधन। अस्थियाँ समता स्थल, दिल्ली में विसर्जित की गईं। 2008 में जन्म शताब्दी मनाई गई।
समता दिवस का संदेशएकता, समानता और न्याय को बढ़ावा देता है। समाज को भेदभाव के खिलाफ खड़े होने और सभी के साथ सम्मान और गरिमा के साथ व्यवहार करने के लिए प्रेरित करता है।

Categories